कौन कहता है कि मुहब्बत एक बार होती है;
दिल में जज़्बा हो तो हज़ार बार होती है;
महज़बीं कोई इधर से गुज़र भर जाए;
इक ख़लिश सी मुझे बार-बार होती है;
(ख़लिश=चुभन)
नादां हो.... परहेज़ ना करो चिलमन से;
आशिकों की नज़र बड़ी खूंखार होती है;
(चिलमन=पर्दा)
छुप के करते हैं इश्क-ओ-आशिकी 'शाहिद';
ख़ुदा जाने ये कैसे इश्तेहार होती है;
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