Saturday, June 9, 2012

खुदा... उनको भी तौफ़ीक-ए-मुहब्बत कर दे



खुदा... उनको भी तौफ़ीक--मुहब्बत कर दे;
वो पहली बार ख़यानत में अमानत कर दे;
(तौफ़ीक--मुहब्बत=प्यार प्रदान करना; ख़यानत=धोखा; अमानत=विश्वाश)




ज़रुरत--नूर है.... मेरी दुनिया में अँधेरा है बहुत;

कभी तो महफ़िल--नाशाद में शिरकत कर दे;
(ज़रुरत--नूर=रौशनी की ज़रूरत; महफ़िल--नाशाद=दुखी की महफ़िल)


बहुत संभल के हसीनों से बात करता हूँ
ना जाने कब ज़रा सी बात पे आफत कर दें;


यहाँ जो लोग नमाज़ी बने से फिरते हैं;
गुल से इक भंवरा लिपट जाए.... तो क़यामत कर दें;

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