खद्दर के
पैरहन में दौड़ बहुत है;
इस नस्ल
के टट्टुओं में होड़ बहुत है;
(पैरहन=कपड़े)
घुट-घुट
के जी रहा हूँ इस बकरमंडी में;
दरवाज़ा बंद
कर... उफ़.... शोर बहुत है;
वो भी ना
आए... और अब दम भी नहीं बचा;
कहता है
कौन इश्क में ज़ोर बहुत है...?
बावले हो
जाओगे, सुनने की जिद्द को छोड़ो;
मेरी दास्तान-ए-इश्क
में मोड़ बहुत है;
bahut khoob
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