खुदा
है
वो या है भगवान्.... ये मलाल क्यूं है..?
इक
तर्जुमे
को ले कर इतना बवाल क्यूं है..?
जो
ग़र नहीं
हो यकीं मुझपे... आज़मा मुझको ;
वो
मुद्दतों
से तेरे दिल में फिर सवाल क्यूं है ;
तुझे
हो
मुझसे हिकारत, ये हो नहीं सकता ;
भुला
दिया
है अगर मुझको तो ख़्याल क्यूं है ;
(हिकारत=नफरत)
achche sawal hain
ReplyDeletesabse important aur bada sawal hai...sabko ek bar khud se puchna chahiye
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